मंडला जिले में कृषि विभाग ने किसानों को अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में चिया की खेती की जानकारी दी है। विभाग ने साफ किया है कि बेहतर उत्पादन के लिए सही समय पर बुआई, उचित बीज दर और वैज्ञानिक फसल प्रबंधन जरूरी है।
चिया एक वर्षीय तिलहनी फसल है, जिसकी खेती मध्यप्रदेश के मंदसौर और नीमच सहित देश के कई क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है। इसका पौधा करीब 70 से 100 सेंटीमीटर ऊंचा होता है और इसके बीज काले तथा सफेद रंग के होते हैं। बीज में 30 से 35 प्रतिशत तक तेल पाया जाता है।
बुआई का समय और खेत की तैयारी
प्रकाश संवेदनशील चिया की बुआई खरीफ में जून-जुलाई के बाद और रबी में अक्टूबर-नवंबर के दौरान उपयुक्त बताई गई है। एक एकड़ के लिए करीब 1 से 1.5 किलोग्राम बीज चाहिए। कतारों के बीच 30 से 45 सेंटीमीटर दूरी रखने और बीज को 1.5 सेंटीमीटर से अधिक गहराई में नहीं बोने की सलाह है।
यह फसल अलग-अलग तरह की जमीन में उगाई जा सकती है, लेकिन हल्की, भुरभुरी, रेतीली और जल निकास वाली मिट्टी अधिक उपयुक्त मानी गई है। जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को समतल और मिट्टी को बारीक करना चाहिए। खाद और उर्वरक का इस्तेमाल मिट्टी परीक्षण के आधार पर करने की सलाह दी गई है।
90 से 120 दिन में पक सकती है फसल
विभाग के अनुसार चिया की फसल लगभग 90 से 120 दिन में तैयार होती है। पौधों में 40 से 50 दिन के भीतर फूल आने लगते हैं और पुष्पन के 25 से 30 दिन बाद बीज पक जाते हैं। पौधे और बालियां पीली पड़ने पर कटाई कर थ्रेसर से बीज निकाले जा सकते हैं।
उपज और बाजार भाव गुणवत्ता पर निर्भर
मौसम और फसल प्रबंधन के आधार पर प्रति एकड़ करीब 4 से 6 क्विंटल उपज मिलने का अनुमान बताया गया है। गुणवत्ता के अनुसार सामान्य विक्रय मूल्य 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है, जबकि नीमच जैसी प्रमुख मंडियों में 15,000 से 19,000 रुपये प्रति क्विंटल तक थोक भाव दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
फसल में सामान्यतः दो से तीन सिंचाई की जरूरत बताई गई है। खरपतवार नियंत्रण के लिए करीब 30 दिन के अंतराल पर दो से तीन बार निदाई-गुड़ाई और आवश्यक फसल सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी गई है।




